हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
म॒रुतः॑ पो॒त्रात्सु॒ष्टुभः॑ स्व॒र्कादृ॒तुना॒ सोमं॑ पिबतु ॥ (१)
मरुद्गण होता के सुंदर स्तोत्रं वाले तथा सुंदर मंत्रों से युक्त यज्ञ कर्म में संस्कार किए गए अर्थात्‌ कूटे और निचोड़े गए सोम का पान करें. (१)
Drink the soma performed in the yajna karma with beautiful stotras of Marudgan Hota and with beautiful mantras, that is, drink the crushed and squeezed Soma. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
अ॒ग्निराग्नी॑ध्रात्सु॒ष्टुभः॑ स्व॒र्कादृ॒तुना॒ सोमं॑ पिबतु ॥ (२)
अग्नि देव! अग्नि को प्रज्वलित करने वाले ऋत्विज्‌ के कर्म से प्रसन्न होते हुए सोम रस का पान करें. यह कर्म सुंदर स्तोत्रों और सुंदर मंत्रों वाला है. (२)
Agni God! Drink Som Rasa while being pleased with the karma of Ritvij who ignites the agni. This karma is full of beautiful stotras and beautiful mantras. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
इन्द्रो॑ ब्र॒ह्मा ब्राह्म॑णात्सु॒ष्टुभः॑ स्व॒र्कादृ॒तुना॒ सोमं॑ पिबतु ॥ (३)
ब्रह्मात्मा इंद्र! ब्राह्मण नाम के ऋत्विज्‌ की सुंदर स्तुतियों से पूर्ण यज्ञ कर्म में संस्कार किए गए अर्थात्‌ निचोड़े गए सोम का पान करो. (३)
Brahmatma Indra! Drink the rituals performed in the full yajna karma with the beautiful praises of the Brahmin name Ritwija. (3)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 2
दे॒वो द्र॑विणो॒दाः पो॒त्रात्सु॒ष्टुभः॑ स्व॒र्कादृ॒तुना॒ सोमं॑ पिबतु ॥ (४)
द्रविणोदा अर्थात्‌ धन देने वाले देव होता के सुंदर स्तोत्रों तथा सुंदर मंत्रों वाले यज्ञ कर्म में संस्कार किए गए अर्थात्‌ निचोड़े गए सोम का पान करें. (४)
Drink the summed somas performed in the yagya karma with beautiful stotras and beautiful mantras of Dravinoda i.e. the god who gives wealth. (4)