हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
अ॒भि त्वा॑ वृषभा सु॒ते सु॒तं सृ॑जामि पी॒तये॑ । तृ॒म्पा व्यश्नुही॒ मद॑म् ॥ (१)
हे वर्षा करने वाले इंद्र! सोम के निचोड़ लिए जाने पर एवं शुद्ध हो जाने पर हम उसे पीने के लिए तुम्हें बुलाते हैं. उस हर्षदायक सोम को पी कर तुम तृप्त बनो. तुम उस प्रसन्न करने वाले सोम रस को विशेष रूप से प्राप्त करो. (१)
O Indra, the one who rains! When the som is squeezed and purified, we invite you to drink it. You become satisfied by drinking that joyful som. You get that pleasing som juice specially. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
मा त्वा॑ मू॒रा अ॑वि॒ष्यवो॒ मोप॒हस्वा॑न॒ आ द॑भन् । माकीं॑ ब्रह्म॒द्विषो॑ वनः ॥ (२)
हे इंद्र! तुम्हारी कृपा से हम अपने पालन की इच्छा करते हैं. अपनी रक्षा का उपाय न जानते हुए मूर्ख तुम्हारी हिंसा न करें. जो ब्राह्मणों से द्वेष करने वाले हैं, तुम उन की सेवा को स्वीकार मत करो. (२)
O Indra! By your grace we wish to follow us. Fools should not violence you without knowing the way to protect you. Don't accept the service of those who hate Brahmins. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
इ॒ह त्वा॒ गोप॑रीणसा म॒हे म॑न्दन्तु॒ राध॑से । सरो॑ गौ॒रो यथा॑ पिब ॥ (३)
हे इंद्र! ऋत्विज्‌ धन प्राप्ति के लिए तुम्हें गाय के दूध से मिश्रित सोमरस दे कर प्रसन्न करें. गौर मृग अत्यधिक प्यासा होने पर जिस प्रकार जल पीता है, तुम उसी प्रकार सोमरस को पियो. (३)
O Indra! To get ridvij wealth, please you by giving memaras mixed with cow's milk. Just as the gaur antelope drinks water when it is very thirsty, you drink someras in the same way. (3)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
अ॒भि प्र गोप॑तिं गि॒रेन्द्र॑मर्च॒ यथा॑ वि॒दे । सू॒नुं स॒त्यस्य॒ सत्प॑तिम् ॥ (४)
हे स्तोता! तुम इंद्र की पूजा उस प्रकार करो, जिस से वे हमें अपना मान लें. इंद्र सत्य के पुत्र और सत्य की रक्षा करने वाले हैं. (४)
O Stotta! Worship Indra in such a way that he considers us as his own. Indra is the son of truth and the protector of truth. (4)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
आ हर॑यः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ । यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे ॥ (५)
इंद्र के सुंदर अश्व उन के रथ को हमारे यज्ञ में बिछे हुए कुशों के समीप लाएं. (५)
May the beautiful horses of Indra bring his chariot closer to the Kushas laid in our yajna. (5)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
इन्द्रा॑य॒ गाव॑ आ॒शिरं॑ दुदु॒ह्रे व॒ज्रिणे॒ मधु॑ । यत्सी॑मुपह्व॒रे वि॒दत् ॥ (६)
वज्रधारी इंद्र के लिए गाएं उस समय मधुर दूध दुहाती हैं जिस समय पास में रखे हुए मधुर एवं स्वादिष्ट सोमरस को इंद्र पीते हैं. (६)
Cows for Vajradhari Indra milk at the time when Indra drinks the sweet and delicious Someras kept nearby. (6)