हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
उप॑ नः सु॒तमा ग॑हि॒ सोम॑मिन्द्र॒ गवा॑शिरम् । हरि॑भ्यां॒ यस्ते॑ अस्म॒युः ॥ (१)
हे इंद्र! हमारा सोम गाय के दूध से युक्त है. तुम उसे पीने के लिए हमारे पास आओ. तुम्हारे जिन रथों में घोड़ों को जोड़ दिया गया है, वे रथ हमारे यज्ञ में आना चाहते हैं. (१)
O Indra! Our SOM is laced with cow's milk. You come to us to drink him. Your chariots to which horses have been added, those chariots want to come to our yagna. (1)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
तमि॑न्द्र॒ मद॒मा ग॑हि बर्हि॒ष्ठां ग्राव॑भिः सु॒तम् । कु॒विन्न्वस्य तृ॒प्णवः॑ ॥ (२)
हे इंद्र! यह सोम कुशाओं पर रखा है. तुम इस की ओर आओ तथा इसे पी कर तृप्त बनो. (२)
O Indra! It is placed on the Som Kushas. You come towards it and drink it and be satisfied. (2)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
इन्द्र॑मि॒त्था गिरो॒ ममाच्छा॑गुरिषि॒ता इ॒तः । आ॒वृते॒ सोम॑पीतये ॥ (३)
हमारी स्तुति रूपी वाणियां इंद्र को हमारे यज्ञ में लाने के लिए उन के पास जाती हैं. (३)
Our praise speeches go to Indra to bring him to our yajna. (3)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
इन्द्रं॒ सोम॑स्य पी॒तये॒ स्तोमै॑रि॒ह ह॑वामहे । उ॒क्थेभिः॑ कु॒विदा॒गम॑त् ॥ (४)
हम अपनी स्तुतियों के द्वारा इंद्र को सोम पान के लिए बुलाते हैं. इंद्र हमारे यज्ञ में अनेक बार आएं. (४)
We call Indra to drink Soma through our praises. Indra comes to our yajna many times. (4)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
इन्द्र॒ सोमाः॑ सु॒ता इ॒मे तान्द॑धिष्व शतक्रतो । ज॒ठरे॑ वाजिनीवसो ॥ (५)
हे इंद्र! ये सोम, चमस आदि तुम्हारे हेतु एकत्र किए गए हैं. तुम इस सोम को उदरस्थ करो. (५)
O Indra! These Mons, Chamas etc. have been collected for you. You make this Mon abdominal. (5)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
वि॒द्मा हि त्वा॑ धनंज॒यं वाजे॑षु दधृ॒षं क॑वे । अधा॑ ते सु॒म्नमी॑महे ॥ (६)
हे इंद्र! हम जानते हैं कि तुम युद्ध के अवसर पर शत्रुओं को अपने वश में करते हो तथा धनों के विजेता हो. (६)
O Indra! We know that you subdue enemies on the occasion of war and are the conqueror of wealth. (6)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
इ॒ममि॑न्द्र॒ गवा॑शिरं॒ यवा॑शिरं च नः पिब । आ॒गत्या॒ वृष॑भिः सु॒तम् ॥ (७)
हे इंद्र! यहां आ कर पत्थरों से कूट कर तैयार किए गए और गाय का दूध मिले हुए सोम का पान करो. (७)
O Indra! Come here and drink som prepared by crushing with stones and mixed with cow's milk. (7)

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
तुभ्येदि॑न्द्र॒ स्व ओ॒क्ये॒ सोमं॑ चोदामि पी॒तये॑ । ए॒ष रा॑रन्तु ते हृ॒दि ॥ (८)
हे इंद्र! मैं इस सोम को पी कर अपने उदर में भर लेने के लिए तुम्हे प्रेरित करता हूं. यह सोम पीने के बाद तुम्हारे हृदय में रमा रहेगा. (८)
O Indra! I encourage you to drink this Som and fill your stomach. After drinking this Som, rama will remain in your heart. (8)
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