अथर्ववेद (कांड 20)
अ॒स्येदु॑ त्वे॒षसा॑ रन्त॒ सिन्ध॑वः॒ परि॒ यद्वज्रे॑ण सी॒मय॑च्छत् । ई॑शान॒कृद्दा॒शुषे॑ दश॒स्यन्तु॒र्वीत॑ये गा॒धं तु॒र्वणिः॒ कः ॥ (११)
इन्हीं इंद्र के दीप्त बल के कारण बहने वाली नदियां अपनेअपने स्थान पर सुशोभित होती हैं, क्योंकि इंद्र ने अपने वज्र से उन्हें नियंत्रित किया है. इंद्र शत्रुओं का वध कर के स्वयं को स्वामी बनाते हुए हवि देने वाले यजमान के लिए अन्न प्रदान करते हैं. (११)
Due to the luminous force of Indra, the rivers flowing are adorned in their own place, because Indra has controlled them with his thunderbolt. Indra kills enemies and makes himself a master and provides food for the host who gives havi. (11)