हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.36.3

कांड 20 → सूक्त 36 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 36
तमी॑मह॒ इन्द्र॑मस्य रा॒यः पु॑रु॒वीर॑स्य नृ॒वतः॑ पुरु॒क्षोः । यो अस्कृ॑धोयुर॒जरः॒ स्वर्वा॒न्तमा भ॑र हरिवो माद॒यध्यै॑ ॥ (३)
हम इंद्र से वीर पुत्रों एवं सेवकों के साथ असीमित धन की याचना करते हैं. हे इंद्र देव! हमें ऐसा धन दो जो कभी समाप्त न हो तथा हमें सुख देता रहे. (३)
We ask Indra for unlimited wealth with brave sons and servants. O Indra Dev! Give us money that never ends and keeps giving us happiness. (3)