हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.37.5

कांड 20 → सूक्त 37 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 37
तव॑ च्यौ॒त्नानि॑ वज्रहस्त॒ तानि॒ नव॒ यत्पुरो॑ नव॒तिं च॑ स॒द्यः । नि॒वेश॑ने शतत॒मावि॑वेषी॒रहं॑ च वृ॒त्रं नमु॑चिमु॒ताह॑न् ॥ (५)
हे वज्रधारी इंद्र! तुम्हारा वज्र बहुत प्रसिद्ध है. तुम ने अपने इसी वज्र से राक्षसों के निन्यानवे नगरों का विनाश किया था तथा उन के सौवें नगर पर अधिकार कर लिया था, तुम ने अपने वज्र से वृत्र और नमुचि नाम के असुरों का भी वध किया था. (५)
O Vajradhari Indra! Your thunderbolt is very famous. You had destroyed ninety-nine cities of demons with this thunderbolt and took possession of their hundredth city, you also killed the asuras named Vritra and Namuchi with your thunderbolt. (5)