हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.39.1

कांड 20 → सूक्त 39 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 39
इन्द्रं॑ वो वि॒श्वत॒स्परि॒ हवा॑महे॒ जने॑भ्यः । अ॒स्माक॑मस्तु॒ केव॑लः ॥ (१)
हम विश्व के सभी प्राणियों की ओर से इंद्र का आह्वान करते हैं. वे इंद्र हमारे ही हों. (१)
We invoke Indra on behalf of all beings of the world. Those Indras should be ours. (1)