हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.43.1

कांड 20 → सूक्त 43 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 43
भि॒न्धि विश्वा॒ अप॒ द्विषः॒ बाधो॑ ज॒ही मृधः॑ । वसु॑ स्पा॒र्हं तदा भ॑र ॥ (१)
हे इंद्र! तुम हमारे शत्रुओं को काट कर हमारी युद्ध संबंधी बाधा दूर करो. तुम हमें वह धन प्रदान करो, जिसे सभी पाना चाहते हैं. (१)
O Indra! You cut off our enemies and remove our war obstacles. You give us the money that everyone wants to get. (1)