हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.60.3

कांड 20 → सूक्त 60 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 60
मो षु ब्र॒ह्मेव॑ तन्द्र॒युर्भुवो॑ वाजानां पते । मत्स्वा॑ सु॒तस्य॒ गोम॑तः ॥ (३)
हे अन्नों के स्वामी इंद्र! तुम ब्रह्मा के समान आलसी मत बनो. तुम बुद्धि देने वाले तैयार सोमरस के द्वारा अत्यधिक आनंद प्राप्त करो. (३)
O Swami of food Indra! Don't be as lazy as Brahma. You attain immense pleasure through the prepared somersa that gives you wisdom. (3)