हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.60.6

कांड 20 → सूक्त 60 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 60
ए॒वा ह्य॑स्य॒ काम्या॒ स्तोम॑ उ॒क्थं च॒ शंस्या॑ । इन्द्रा॑य॒ सोम॑पीतये ॥ (६)
सोमरस का पान करते समय इंद्र को स्तोत्र, उकथ और शस्त्र नाम की स्तुतियां बहुत प्रिय लगती हैं. (६)
While drinking Someras, Indra finds praises named Stotra, Ukath and Shastra very dear. (6)