हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.62.3

कांड 20 → सूक्त 62 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 62
यो न॑ इ॒दमि॑दं पु॒रा प्र वस्य॑ आनि॒नाय॒ तमु॑ व स्तुषे । सखा॑य॒ इन्द्र॑मू॒तये॑ ॥ (३)
हे यजमानो! तुम्हारी रक्षा के निमित्त हम इंद्र का आह्वान करते हैं. हमें पहले गौ आदि के रूप में धन प्रदान करने वाले इंद्र मनचाहा फल देने में समर्थ हैं. हम उन्हीं इंद्र की स्तुति करते हैं. (३)
O hosts! We invoke Indra to protect you. Indra, who first gave us money in the form of cow etc., is able to give the desired results. We praise the same Indra. (3)