अथर्ववेद (कांड 20)
वि॒भ्राजं॒ ज्योति॑षा॒ स्वरग॑च्छो रोच॒नं दि॒वः । दे॒वास्त॑ इन्द्र स॒ख्याय॑ येमिरे ॥ (७)
हे इंद्र! सभी देवता तुम्हारे मित्र हैं. जो सूर्य स्वर्ग में प्रकाश करते हैं, वे तुम्हारे द्वारा ही ज्योतिमान है. (७)
O Indra! All gods are your friends. The sun that lights in heaven is the light through you. (7)