अथर्ववेद (कांड 20)
यस्य॑ द्वि॒बर्ह॑सो बृ॒हत्सहो॑ दा॒धार॒ रोद॑सी । गि॒रीँरज्राँ॑ अ॒पः स्वर्वृषत्व॒ना ॥ (९)
जो इंद्र अपनी महिमा से आकाश, पृथ्वी, जल, पर्वतों, वज्र, बल तथा स्वर्ग को धारण करते हैं, तुम उन्हीं इंद्र का पूजन करो. (९)
You should worship Indra, the one who possesses the sky, earth, water, mountains, thunderbolt, force and heaven with his glory. (9)