हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.63.5

कांड 20 → सूक्त 63 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 63
क॒दा मर्त॑मरा॒धसं॑ प॒दा क्षुम्प॑मिव स्फुरत् । क॒दा नः॑ शुश्रव॒द्गिर॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग ॥ (५)
वे इंद्र यज्ञ न करने वालों पर अपने चरण का प्रहार कर के उन्हें कब ताड़ना देंगे तथा हम स्तोताओं की प्रार्थना कब सुनेंगे? (५)
When will they attack those who do not perform Indra Yajna and chastise them by attacking them and when will we hear the prayers of the psalmists? (5)