हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.63.7

कांड 20 → सूक्त 63 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 63
य इ॑न्द्र सोम॒पात॑मो॒ मदः॑ शविष्ठ॒ चेत॑ति । येना॒ हंसि॒ न्यत्त्रिणं॒ तमी॑महे ॥ (७)
हे इंद्र! तुम सोमरस अत्यधिक पीते हो. उस से बल उत्पन्न होता है. हे इंद्र! तुम अपने जिस बल से असुरों का नाश करते हो, हम तुम से उसी बल की याचना करते हैं. (७)
O Indra! You drink sommers excessively. Force is generated from it. O Indra! With the force with which you destroy the asuras, we beseech you for the same force. (7)