हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.68.2

कांड 20 → सूक्त 68 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 68
उप॑ नः॒ सव॒ना ग॑हि॒ सोम॑स्य सोमपाः पिब । गो॒दा इद्रे॒वतो॒ मदः॑ ॥ (२)
ऐश्वर्य संपन्न इंद्र सदा प्रसन्न रहते हैं और यजमानों को गाएं देते हैं. हे इंद्र! प्रातःकाल, मध्याह्न और सायंकाल के तीन सवनों में आ कर सोमरस का पान करो. (२)
Indra, who is rich in wealth, is always happy and sings to the hosts. O Indra! Come in three morning, midday and evening and drink somras. (2)