अथर्ववेद (कांड 20)
अ॒स्मान्त्सु तत्र॑ चोद॒येन्द्र॑ रा॒ये रभ॑स्वतः । तुवि॑द्युम्न॒ यश॑स्वतः ॥ (१२)
हे इंद्र! तुम हमें महान, यशस्वी और ऐश्वर्य वाला होने की प्रेरणा दो. (१२)
O Indra! May you inspire us to be great, successful and opulence. (12)
कांड 20 → सूक्त 71 → मंत्र 12 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation