अथर्ववेद (कांड 20)
वसो॒रिन्द्रं॒ वसु॑पतिं गी॒र्भिर्गृ॒णन्त॑ ऋ॒ग्मिय॑म् । होम॒ गन्ता॑रमू॒तये॑ ॥ (१५)
हम धन के स्वामी, वसुओं के ईश्वर, ऋग्वेद के द्वारा प्रशंसित इंद्र की साधनों से पूजा करते हैं. (१५)
We worship Indra, the swami of wealth, the God of Vasus, admired by the Rig Veda, by means. (15)