हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.76.5

कांड 20 → सूक्त 76 → मंत्र 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 76
प्रेर॑य॒ सूरो॒ अर्थं॒ न पा॒रं ये अ॑स्य॒ कामं॑ जनि॒धा इ॑व॒ ग्मन् । गिर॑श्च॒ ये ते॑ तुविजात पू॒र्वीर्नर॑ इन्द्र प्रति॒शिक्ष॒न्त्यन्नैः॑ ॥ (५)
हे इंद्र! जो रशिमियां इस यजमान की इच्छा पूर्ति के लिए माता के समान मिलती हैं, उन रश्भियों में हमें अर्थ के समान पार करो. पवन देव इसे अन्न प्रदान करें. हे इंद्र! तुम अपनी प्राचीन स्तुतियां इस की बुद्धि में लाओ. (५)
O Indra! Cross us as meaning in the rashamis that are found as mothers to fulfill the desire of this host. May Pawan Dev provide food to it. O Indra! You bring your ancient praises into the wisdom of this. (5)