हरि ॐ
अथर्ववेद (Atharvaved)
अथर्ववेद (कांड 20)
इन्द्र॑ त्रि॒धातु॑ शर॒णं त्रि॒वरू॑थं स्वस्ति॒मत् । छ॒र्दिर्य॑च्छ म॒घव॑द्भ्यश्च॒ मह्यं॑ च या॒वया॑ दि॒द्युमे॑भ्यः ॥ (१)
हे इंद्र! मुझे मंगलकारी घर दो तथा हिंसा करने वाली शक्तियों को यहां से दूर भगाओ. (१)
O Indra! Give me a happy house and drive away the forces of violence from here. (1)
अथर्ववेद (कांड 20)
ये ग॑व्य॒ता मन॑सा॒ शत्रु॑माद॒भुर॑भिप्र॒घ्नन्ति॑ धृष्णु॒या । अध॑ स्मा नो मघवन्निन्द्र गिर्वणस्तनू॒पा अन्त॑मो भव ॥ (२)
हे इंद्र! तुम्हारे जो बल शत्रुओं को संतप्त करते और मारते हैं, तुम अपने उन्हीं बलों से हमारे शरीरों की रक्षा करो. (२)
O Indra! Protect our bodies with the same forces of yours that plague and kill enemies. (2)