हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.84.3

कांड 20 → सूक्त 84 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 84
इन्द्रा या॑हि॒ तूतु॑जान॒ उप॒ ब्रह्मा॑णि हरिवः । सु॒ते द॑धिष्व न॒श्चनः॑ ॥ (३)
हे इंद्र! तुम अश्वों के स्वामी हो, इसलिए हमारे स्तोत्रों को सुनने के लिए हमारे समीप शीघ्र आओ तथा हमारे तैयार सोमरस के पास अपने अश्चों को रोको. (३)
O Indra! You are the swami of horses, so come quickly to us to hear our psalms and stop your horses near our ready someras. (3)