अथर्ववेद (कांड 20)
य॒दा वाज॒मस॑नद्वि॒श्वरू॑प॒मा द्याम॑रुक्ष॒दुत्त॑राणि॒ सद्म॑ । बृह॒स्पतिं॒ वृष॑णं व॒र्धय॑न्तो॒ नाना॒ सन्तो॒ बिभ्र॑तो॒ ज्योति॑रा॒सा ॥ (१०)
बृहस्पति देव जिस समय संसार से संबंधित सभी हव्यों का सेवन करते हैं. तब वे आकाश के ऊपर जा कर उत्तम लोकों में प्रतिष्ठा पाते हैं. उस समय शक्ति संपन्न बृहस्पति देव को शेष सभी देव अपने वचनों से उत्साह प्रदान करते हैं. कामनाओं को पूर्ण करने वाले बृहस्पति को शेष देव अलगअलग दिशाओं में रहते हुए भी उन्नति प्रदान करते हैं. (१०)
When Jupiter dev consumes all the things related to the world. Then they go up to the sky and get prestige in the best worlds. At that time, all the other gods give enthusiasm to the powerful Jupiter Dev with their words. The rest of the gods give progress to Jupiter, who fulfills the desires, even while living in different directions. (10)