अथर्ववेद (कांड 20)
इन्द्रो॑ म॒ह्ना म॑ह॒तो अ॑र्ण॒वस्य॒ वि मू॒र्धान॑मभिनदर्बु॒दस्य॑ । अह॒न्नहि॒मरि॑णात्स॒प्त सिन्धू॑न्दे॒वैर्द्या॑वापृथिवी॒ प्राव॑तं नः ॥ (१२)
इंद्र अपनी महिमा के द्वारा मेघ का मस्तक काट देते हैं. वे मेघ पर प्रहार कर के सात नदियों को प्रकट करते हैं. हे आकाश और पृथ्वी! तुम हमारा पोषण करने वाले बनो. (१२)
Indra cuts off Megh's head through his glory. They attack the cloud and reveal the seven rivers. O heaven and earth! You be our nurturer. (12)