हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.92.10

कांड 20 → सूक्त 92 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 92
यो व्यतीँ॒रफा॑णय॒त्सुयु॑क्ताँ॒ उप॑ दा॒शुषे॑ । त॒क्वो ने॒ता तदिद्वपु॑रुप॒मा यो अमु॑च्यत ॥ (१०)
हवि दाता के लिए जो नेता उत्तम युक्तियों का प्रयोग करते हैं, उन की उपमा उन का शरीर ही है. तात्पर्य यह है कि कोई अन्य उन के समान नहीं है. (१०)
The body of the leaders who use the best tips for the giver of Havi is their body. The implication is that no other is the same as them. (10)