अथर्ववेद (कांड 20)
अ॑र्भ॒को न कु॑मार॒कोऽधि॑ तिष्ठ॒न्नवं॒ रथ॑म् । स प॑क्षन्महि॒षं मृ॒गं पि॒त्रे मा॒त्रे वि॑भु॒क्रतु॑म् ॥ (१२)
इंद्र श्रेष्ठ राजकुमार के समान अपने रथ पर बैठते हैं. वे अपने पिता द्यावा और माता पृथ्वी के निमित्त खाने के लिए भोजन पकाते हैं. (१२)
Indra sits on his chariot like a superior prince. They cook food for their father Dyawa and mother Prithvi. (12)