हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.92.15

कांड 20 → सूक्त 92 → मंत्र 15 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 92
अनु॑ प्र॒त्नस्यौक॑सः प्रि॒यमे॑धास एषाम् । पूर्वा॒मनु॒ प्रय॑तिं वृ॒क्तब॑र्हिषो हि॒तप्र॑यस आशत ॥ (१५)
प्रिय मेधा वाले ऋत्विज्‌ इन इंद्र के पूर्व दिशा में बने भवन से हितकारी अन्न प्राप्त कर के प्रगति करते हैं. (१५)
The beloved talented Ritvijas progress by getting beneficial food from the building built in the east direction of Indra. (15)