हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.92.2

कांड 20 → सूक्त 92 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 92
आ हर॑यः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ । यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे ॥ (२)
जिन कुशों पर हम इंद्र का पूजन कर रहे हैं, उन पर इंद्र के घोड़े उनके रथ को पहुचाएं. (२)
Indra's horses should reach his chariot on the Kushas on which we are worshiping Indra. (2)