हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 20.94.9

कांड 20 → सूक्त 94 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 20)

अथर्ववेद: | सूक्त: 94
इ॒मं बि॑भर्मि॒ सुकृ॑तं ते अङ्कु॒शं येना॑रु॒जासि॑ मघवञ्छफा॒रुजः॑ । अ॒स्मिन्त्सु ते॒ सव॑ने अस्त्वो॒क्यं सु॒त इ॒ष्टौ म॑घवन्बो॒ध्याभ॑गः ॥ (९)
हे इंद्र! मैं तुम्हारे अंकुश को धारण करता हूं. तुम अपने इस अंकुश के द्वारा नख वाले पीड़ा दाता प्राणियों को नष्ट करते हो. इस सवन में तुम प्रजा प्राप्त करो तथा सोमरस निष्पन्न हो जाने पर धन के जानने वाले बनो. (९)
O Indra! I hold your control. Through this control of yours, you destroy the suffering creatures with nails. In this savan, you gain people and become the knowers of money when somerasa is born. (9)