हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.11.9

कांड 4 → सूक्त 11 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
यो वेदा॑न॒डुहो॒ दोहा॑न्स॒प्तानु॑पदस्वतः । प्र॒जां च॑ लो॒कं चा॑प्नोति॒ तथा॑ सप्तऋ॒षयो॑ विदुः ॥ (९)
जो पुरुष इस बैल के क्षय रहित जौ आदि रूप सात दोहनों को जानता है, वह पुत्र, पौत्र आदि संतान तथा स्वर्ग आदि लोकों को प्राप्त करता है. इस बात को सप्त ऋषि जानते हैं. (९)
The man who knows the seven exploits of this bull in the form of barley etc. without decay, he gets sons, grandsons etc. children and heaven etc. Sapta Rishi knows this. (9)