हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.20.8

कांड 4 → सूक्त 20 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 20
उद॑ग्रभं परि॒पाणा॑द्यातु॒धानं॑ किमी॒दिन॑म् । तेना॒हं सर्वं॑ पश्याम्यु॒त शू॒द्रमु॒तार्य॑म् ॥ (८)
खोज करने के लिए घूमते हुए राक्षसो को मैं ने अपनी रक्षा की दृष्टि से वश में कर लिया है. उस पिशाच की सहायता से मैं शूद्र एवं ब्राह्मण जाति वाले ग्रह को देखता हूं. (८)
I have subdued the demons while roaming around to search for myself with a view to protecting me. With the help of that vampire, I see the planet of Shudra and Brahmin jati. (8)