अथर्ववेद (कांड 4)
अ॒यम॑स्तु॒ धन॑पति॒र्धना॑नाम॒यं वि॒शां वि॒श्पति॑रस्तु॒ राजा॑ । अ॒स्मिन्नि॑न्द्र॒ महि॒ वर्चां॑सि धेह्यव॒र्चसं॑ कृणुहि॒ शत्रु॑मस्य ॥ (३)
हे इंद्र! यह राजा धनपतियों में उत्तम धनपति तथा प्रजातियों में उत्तम प्रजापालक हो. इस राजा में महान तेज और वीर्य धारण करो तथा इस राजा के शत्रुओं को तेजहीन बनाओ. (3)
O Indra! This king should be the best wealthy among the rich and the best of the species. Put great radiance and semen in this king and make the enemies of this king bright. (3)