अथर्ववेद (कांड 4)
सह॑स्व मन्यो अ॒भिमा॑तिम॒स्मै रु॒जन्मृ॒णन्प्र॑मृ॒णन्प्रेहि॒ शत्रू॑न् । उ॒ग्रं ते॒ पाजो॑ न॒न्वा रु॑रुध्रे व॒शी वशं॑ नयासा एकज॒ त्वम् ॥ (३)
हे मन्यु! इस राजा के शत्रु की सेना के हाथी, घोड़े आदि को कुचलते हुए एवं नष्ट करते हुए शत्रुओं को पराजित करने के लिए आओ. हे अधिक शक्तिशाली मन्यु! तुम्हारे बल को कोई रोक नहीं सकता. हे बिना सहायक के कार्य करने वाले एवं सब को वश में करने वाले मन्यु! तुम सभी जनों को स्वाधीन बनाते हो. (३)
O Manu! Come to defeat the enemies by crushing and destroying elephants, horses, etc. of this king's enemy's army. O more powerful manu! No one can stop your force. O Manu, who works without help and controls everyone! You make all people independent. (3)