अथर्ववेद (कांड 4)
भी॒मा इन्द्र॑स्य हे॒तयः॑ श॒तं ऋ॒ष्टीर्हि॑र॒ण्ययीः॑ । ताभि॑र्हविर॒दान्ग॑न्ध॒र्वान॑वका॒दान्व्यृ॑षतु ॥ (९)
इंद्र के आयुध भयंकर, सौ धारों वाले एवं सोने के बने हैं. इंद्र उन्हीं से हवि न देने वाले तथा शैवाल भक्षण करने वाले गंधर्वो का वध करें. (९)
Indra's weapons are fierce, hundred-edged and made of gold. Indra should kill the Gandharvas who do not give havi from them and eat algae. (9)