हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 4.38.7

कांड 4 → सूक्त 38 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 4)

अथर्ववेद: | सूक्त: 38
अ॒न्तरि॑क्षेण स॒ह वा॑जिनीवन्क॒र्कीं व॒त्सामि॒ह र॑क्ष वाजिन् । अ॒यं घा॒सो अ॒यं व्र॒ज इ॒ह व॒त्सां नि ब॑ध्नीमः । य॑थाना॒म व॑ ईश्महे॒ स्वाहा॑ ॥ (७)
हे बलवान सूर्य! इस स्थान पर धीरे रंग के बछड़ों का पालन करो. यह घास और गोशाला पुष्टिकर हो. इस गोशाला में मैं बछड़ों को बांधता हूं. मैं तुम्हें उसी प्रकार बांधता हूं, जिस से तुम्हारा स्वामी बन सकूं. यह हवि उत्तम आहुति वाला हो. (७)
O strong sun! Follow the calves of color gently to this place. This grass and cowshed should be confirmatory. In this gaushala, I tie calves. I bind you in such a way that I can be your master. This is the best sacrifice. (7)