हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 8.3.11

कांड 8 → सूक्त 3 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 3
त्रिर्या॑तु॒धानः॒ प्रसि॑तिं त एत्वृ॒तं यो अ॑ग्ने॒ अनृ॑तेन॒ हन्ति॑ । तम॒र्चिषा॑ स्फूर्जय॑ञ्जातवेदः सम॒क्षमे॑नं गृण॒ते नि यु॑ङ्ग्धि ॥ (११)
हे अग्नि देव! राक्षस तुम्हारी ज्वालाओं को तीन बार प्राप्त करें. अर्थात्‌ अग्नि उन्हें तीन बार प्रातः, दोपहर और शाम को जलाएं. जो मेरे सत्य यज्ञ को छल से नष्ट करता है, उसे पकड़ कर मेरे सामने ही अपनी ज्वालाओं से नष्ट कर दो. (११)
O God of Agni! Get the monsters your flames three times. That is, agni burn them three times in the morning, afternoon and evening. Whoever destroys my true sacrifice with deceit, take him and destroy him with his flames in front of me. (11)