अथर्ववेद (कांड 8)
परि॑ त्वाग्ने॒ पुरं॑ व॒यं विप्रं॑ सहस्य धीमहि । धृ॒षद्व॑र्णं दि॒वेदि॑वे ह॒न्तारं॑ भङ्गु॒राव॑तः ॥ (२२)
हे सबको पराजित करने वाले अग्नि देव! हम तुम्हारा सभी प्रकार से ध्यान करते हैं. तुम अभिलाषाएं पूर्ण करने वाले, मेधावी, अधिक वर्षा युक्त तथा प्रतिदिन गिरते हुए बल और स्वभाव वाले राक्षसों के हंता हो. (२२)
O God of agni who defeats all! We meditate on you in all ways. You are the destroyers of demons who fulfill desires, are meritorious, have more rain and falling force and nature every day. (22)