हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 8.4.3

कांड 8 → सूक्त 4 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
इन्द्रा॑सोमा दु॒ष्कृतो॑ व॒व्रे अ॒न्तर॑नारम्भ॒णे तम॑सि॒ प्र वि॑ध्यतम् । यतो॒ नैषां॒ पुन॒रेक॑श्च॒नोदय॒त्तद्वा॑मस्तु॒ सह॑से मन्यु॒मच्छवः॑ ॥ (३)
हे इंद्र और सोम! तुम दुष्कर्म करने वाले राक्षसों को ढकने वाले तथा बिना सहारे वाले अंधकार में धकेलो, जिस से अंधकार में पड़े हुए राक्षसों में से एक भी बाहर न आ सके. तुम दोनों का यह बल राक्षसों को हराने के लिए क्रोध युक्त हो. (३)
O Indra and Soma! You push the evil demons into darkness covering and without support, so that not a single one of the demons lying in darkness can come out. This force of both of you to defeat the demons is angry. (3)