हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
अ॒यं प्र॑तिस॒रो म॒णिर्वी॒रो वी॒राय॑ बध्यते । वी॒र्यवान्त्सपत्न॒हा शूर॑वीरः परि॒पाणः॑ सुम॒ङ्गलः॑ ॥ (१)
तिलक वृक्ष से निर्मित यह मणि कृत्या राक्षसी को उसी के पास लौटा देती है, जो उसे किसी पर जादू टोने के रूप में भेजता है. यह वीरकर्म करने वाले शत्रुओं को भगाने में समर्थ है. यह मणि अतिशय शक्तिशालिनी, शत्रु घातक एवं यजमान की रक्षा करने वाले पुरोहित का मंगल करने वाली है. (१)
This gem made from tilak tree returns the krita rakshasi to the one who sends it as a witchcraft on someone. It is capable of driving away the enemies who do heroic deeds. This gem is going to be very powerful, the enemy is deadly and the priest who protects the host. (1)

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
अ॒यं म॒णिः स॑पत्न॒हा सु॒वीरः॒ सह॑स्वान्वा॒जी सह॑मान उ॒ग्रः । प्र॒त्यक्कृ॒त्या दू॒षय॑न्नेति वी॒रः ॥ (२)
तिलक वृक्ष से निर्मित मणि शत्रु घातक, संतान देने वाली, शक्तिशालिनी, वेगवती, शत्रुओं को पराजित करने वाली, उग्र तथा दूसरे के द्वारा भेजी गई कृत्या राक्षसी को उसी के विरोध में भेजने वाली है. शत्रुओं को अनेक प्रकार से दूषित करने वाली यह मणि हमारे सामने आती है. (२)
The gem made from tilak tree is the enemy deadly, child-giving, powerful, vegvati, defeating enemies, furious and the act sent by others is going to send the demon against him. This gem that contaminates enemies in many ways comes in front of us. (2)

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
अ॒नेनेन्द्रो॑ म॒णिना॑ वृ॒त्रम॑हन्न॒नेनासु॑रा॒न्परा॑भावयन्मनी॒षी । अ॒नेना॑जय॒द्द्यावा॑पृथि॒वी उ॒भे इ॒मे अ॒नेना॑जयत्प्र॒दिश॒श्चत॑स्रः ॥ (३)
किसी भी उपाय से वृत्रासुर को मारने में असफल होने पर इंद्र ने इसी मणि को बांधने के प्रभाव से विजय के उपाय जाने एवं राक्षसों को पराजित एवं नष्ट किया था. इंद्र ने इसी मणि के प्रभाव से धरती और आकाश पर विजय प्राप्त की है. इसी मणि के प्रभाव से इंद्र ने पूर्व, पश्चिम, उत्तर एवं दक्षिण-चारों दिशाओं को जीता है. (३)
After failing to kill Vritrasura by any means, Indra, with the effect of tying this gem, went for victory and defeated and destroyed the demons. Indra has conquered the earth and the sky with the influence of this gem. With the influence of this gem, Indra has won all four directions east, west, north and south. (3)

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
अ॒यं स्रा॒क्त्यो म॒णिः प्र॑तीव॒र्तः प्र॑तिस॒रः । ओज॑स्वान्विमृ॒धो व॒शी सो अ॒स्मान्पा॑तु स॒र्वतः॑ ॥ (४)
तिलक वृक्ष से निर्मित यह मणि, विरोधियों को लौटाने वाली तथा रोग आदि का विनाश करने वाली है. शत्रु विनाशक तेज से युक्त, शत्रुओं को भगा कर युद्ध का अभाव करने वाली एवं सब को वश में करने वाली यह मणि सभी से हमारी रक्षा करे. (४)
This gem made from tilak tree is going to return the opponents and destroy diseases etc. May this gem, which is full of enemy destructive speed, which lacks war by driving away enemies and subduing everyone, protects us from everyone. (4)

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
तद॒ग्निरा॑ह॒ तदु॒ सोम॑ आह॒ बृह॒स्पतिः॑ सवि॒ता तदिन्द्रः॑ । ते मे॑ दे॒वाः पु॒रोहि॑ताः प्र॒तीचीः॑ कृ॒त्याः प्र॑तिस॒रैर॑जन्तु ॥ (५)
उस अग्नि देव ने कृत्या राक्षसी को वापस लौटाने वाली मणि के विषय में मुझे बताया है. सोम, बृहस्पति, सविता एवं इंद्र ने भी मणि के विषय में यही कहा है. अन्य प्रसिद्ध देवों एवं पुरोहितों ने भी इस मणि के द्वारा कृत्या राक्षसी को वापस लौटाया है. (५)
That agni god has told me about the gem that returned krita rakshasi. Som, Brihaspati, Savita and Indra have also said the same about Mani. Other famous gods and priests have also returned krita rakshasi through this gem. (5)

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
अ॒न्तर्द॑धे॒ द्यावा॑पृथि॒वी उ॒ताह॑रु॒त सूर्य॑म् । ते मे॑ दे॒वाः पु॒रोहि॑ताः प्र॒तीचीः॑ कृ॒त्याः प्र॑तिस॒रैर॑जन्तु ॥ (६)
मैं धरती और आकाश को तथा दिवस और सूर्य को अपने तथा कृत्या राक्षसी के मध्य में स्थापित करता हूं. धरती, आकाश आदि देव एवं यजमान को कृत्या से बचाने वाले पुरोहित तिलक वृक्ष से मणि के द्वारा कृत्या राक्षसी को वापस करें. (६)
I establish the earth and the sky and the day and the sun between me and the krita demon. Return the karta rakshasi by gem from the tilak tree, who saved the earth, sky etc. from the sky etc. and the host. (6)

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
ये स्रा॒क्त्यं म॒णिं जना॒ वर्मा॑णि कृ॒ण्वते॑ । सूर्य॑ इव॒ दिव॑मा॒रुह्य॒ वि कृ॒त्या बा॑धते व॒शी ॥ (७)
कृत्या राक्षसी से बचाने वाले लोग तिलक वृक्ष से निर्मित मणि को अपना कवच बना लेते हैं. यह मणि दूसरे द्वारा भेजी गई कृत्या का उसी प्रकार विनाश करती है, जिस प्रकार सूर्य आकाश में पहुंच कर अंधकार का विनाश करते हैं. (७)
People who protect from Krita Rakshasi make the gem made of tilak tree their armor. This gem destroys the work sent by another in the same way as the sun reaches the sky and destroys darkness. (7)

अथर्ववेद (कांड 8)

अथर्ववेद: | सूक्त: 5
स्रा॒क्त्येन॑ म॒णिना॒ ऋषि॑णेव मनी॒षिणा॑ । अजै॑षं॒ सर्वाः॒ पृत॑ना॒ वि मृधो॑ हन्मि र॒क्षसः॑ ॥ (८)
मुझ साधक ने तिलक वृक्ष द्वारा निर्मित मणि की सहायता से पूतना नामक सभी राक्षसियों को उसी प्रकार जीत लिया है, जिस प्रकार विद्वान्‌ ऋषि अथर्वा ने जीता था. मैं उपद्रवकारी राक्षसों को तिलक वृक्ष से निर्मित मणि के द्वारा नष्ट करता हूं. (८)
I seeker, with the help of a gem made by the Tilak tree, have conquered all the demons called Putna in the same way as the learned sage Atharva won. I destroy the rowdy demons with a gem made of tilak tree. (8)
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