हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.1.11

कांड 9 → सूक्त 1 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
यथा॒ सोमः॑ प्रातःसव॒ने अ॒श्विनो॑र्भवति प्रि॒यः । ए॒वा मे॑ अश्विना॒ वर्च॑ आ॒त्मनि॑ ध्रियताम् ॥ (११)
जिस प्रकार अश्चिनीकुमारों को प्रातः सवन में सोमरस प्रिय लगता है, अश्विनीकुमार उस प्रकार मुझ में तेज की स्थापना करें. (११)
Just as Ashwini Kumars find Someras dear in the morning, Ashwinikumar should establish tej in me in the same way. (11)