हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.1.22

कांड 9 → सूक्त 1 → मंत्र 22 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 1
यो वै कशा॑याः स॒प्त मधू॑नि॒ वेद॒ मधु॑मान्भवति । ब्रा॑ह्म॒णश्च॒ राजा॑ च धे॒नुश्चा॑न॒ड्वांश्च॑ व्री॒हिश्च॒ यव॑श्च॒ मधु॑ सप्त॒मम् ॥ (२२)
निश्चय ही जो ब्रह्म के सात मधुओं को जानता है, वह मधु वाला बन जाता है तथा ब्राह्मण, राजा, गौ, बैल, धान, जौ के अतिरिक्त दसवां मधु ब्रह्म है. (२२)
Surely, one who knows the seven madhus of Brahman becomes a honey man and the tenth Madhu is Brahman besides Brahmin, king, cow, bull, paddy, barley. (22)