अथर्ववेद (कांड 9)
सपत्न॒हन॑मृष॒भं घृ॒तेन॒ कामं॑ शिक्षामि ह॒विषाज्ये॑न । नी॒चैः स॒पत्ना॒न्मम॑ पादय॒ त्वम॒भिष्टु॑तो मह॒ता वी॒र्येण ॥ (१)
मैं शत्रु विनाशक वृषभ रूपी काम को हवि एवं आज्य से प्रसन्न करता हूं. हे वृषभ! तुम्हारी स्तुति करने वाले मुझ स्तोता के शत्रुओं को तुम अपने महान पराक्रम से नीचे गिराओ. (१)
I please the work of Taurus, the destroyer of the enemy, with havi and ajya. O Taurus! Bring down the enemies of my psalms who praise you with your great might. (1)
अथर्ववेद (कांड 9)
यन्मे॒ मन॑सो॒ न प्रि॒यं न चक्षु॑षो॒ यन्मे॒ बभ॑स्ति॒ नाभि॒नन्द॑ति । तद्दुः॒ष्वप्न्यं॒ प्रति॑ मुञ्चामि स॒पत्ने॒ कामं॑ स्तु॒त्वोद॒हं भि॑देयम् ॥ (२)
जो बुरा स्वप्न न मुझ को अच्छा लगता है और न मेरे नेत्रों को सुहाता है, जो मुझे भक्षण करता हुआ मालूम होता है और मुझे प्रसन्न नहीं करता, उस बुरे स्वप्र को काम की स्तुति करने वाला मैं शन्रु की ओर छोड़ता हूं. वह बुरा स्वप्न रूपी शत्रु का भेदन करे. (२)
The bad dream that neither makes me like nor makes my eyes pleasant, which seems to be devouring to me and does not please me, I leave that bad self to the one who praises the work towards the moon. He should penetrate the enemy of a bad dream. (2)
अथर्ववेद (कांड 9)
दुः॒ष्वप्न्यं॑ काम दुरि॒तं च॑ कमाप्र॒जस्ता॑मस्व॒गता॒मव॑र्तिम् । उ॒ग्र ईशा॑नः॒ प्रति॑ मुञ्च॒ तस्मि॒न्यो अ॒स्मभ्य॑मंहूर॒णा चिकि॑त्सात् ॥ (३)
हे उग्र एवं स्वामी कामदेव! तुम अपने स्वप्न रूपी पाप को प्रजा अर्थात् संतान की हीनता को एवं निर्धनता को उसी और भेजो जो पराजय कर के हमें विपत्ति में डालने की चेष्टा करता है. (३)
O fierce and swami Kamadeva! You should send your dream sin to the inferiority of the people, that is, the children, and the poverty to the one who tries to defeat and put us in disaster. (3)
अथर्ववेद (कांड 9)
नु॒दस्व॑ काम॒ प्र णु॑दस्व का॒माव॑र्तिं यन्तु॒ मम॒ ये स॒पत्नाः॑ । तेषां॑ नु॒त्ताना॑मध॒मा तमां॒स्यग्ने॒ वास्तू॑नि॒ निर्द॑ह॒ त्वम् ॥ (४)
हे कामदेव! दरिद्रता को उन की और जाने के लिए प्रेरित करो जो मेरे शत्रु हैं. वे ही मेरी दरिद्रता को प्राप्त करें. हे अग्नि! वे अंधकार में पड़े रहें. तुम उन के घर की वस्तुओं को भस्म कर दो. (४)
O Cupid! Inspire poverty to go towards those who are my enemies. They are the ones who attain my poverty. O agni! They should remain in darkness. You consume the objects of their house. (4)
अथर्ववेद (कांड 9)
सा ते॑ काम दुहि॒ता धे॒नुरु॑च्यते॒ यामा॒हुर्वाचं॑ क॒वयो॑ वि॒राज॑म् । तया॑ स॒पत्ना॒न्परि॑ वृङ्ग्धि॒ ये मम॒ पर्ये॑नान्प्रा॒णः प॒शवो॒ जीव॑नं वृणक्तु ॥ (५)
हे कामदेव! सभी जिसे ओजपूर्ण वाणी कहते हैं, वह तुम्हारी पुत्री है. तुम उस के द्वारा मेरे शत्रुओं का नाश करो. प्राण, पशु और जीवन उन के पास न रहें. (५)
O Cupid! What everyone calls energetic speech is your daughter. Destroy my enemies through him. Life, animals and life should not be with them. (5)
अथर्ववेद (कांड 9)
काम॒स्येन्द्र॑स्य॒ वरु॑णस्य॒ राज्ञो॒ विष्णो॒र्बले॑न सवि॒तुः स॒वेन॑ । अ॒ग्नेर्हो॒त्रेण॒ प्र णु॑दे स॒पत्ना॑ञ्छ॒म्बीव॒ नाव॑मुद॒केषु॒ धीरः॑ ॥ (६)
जिस प्रकार पतवार धारण करने वाला नाविक नौका चलाता है, उसी प्रकार मैं कामदेव के, इंद्र के, राजा वरुण के, विष्णु के और सविता के बल से तथा देवों के यज्ञ से शत्रुओं को दूर भगाता हूं. (६)
Just as the sailor who holds the helm drives the boat, in the same way I drive away the enemies by the strength of Kamadeva, Indra, King Varuna, Vishnu and Savita and with the sacrifice of the gods. (6)
अथर्ववेद (कांड 9)
अध्य॑क्षो वा॒जी मम॒ काम॑ उ॒ग्रः कृ॒णोतु॒ मह्य॑मसप॒त्नमे॒व । विश्वे॑ दे॒वा मम॑ ना॒थं भ॑वन्तु॒ सर्वे॑ दे॒वा हव॒मा य॑न्तु म इ॒मम् ॥ (७)
सभी देव मेरे इस यज्ञ में आएं एवं मेरे स्वामी, शक्तिशाली कामदेव मेरी आंखों के सामने ही इसे पूर्ण करें तथा मुझे शत्रु रहित बनाएं. (७)
May all the gods come to this yagna of mine and my master, the powerful Kamadeva, complete it in front of my eyes and make me enemy-free. (7)
अथर्ववेद (कांड 9)
इ॒दमाज्यं॑ घृ॒तव॑ज्जुषा॒णाः काम॑ज्येष्ठा इ॒ह मा॑दयध्वम् । कृ॒ण्वन्तो॒ मह्य॑मसप॒त्नमे॒व ॥ (८)
हे कामदेव को अपने से बड़ा मानने वाले देवो! मेरे घृत वाले आज्य का सेवन करते हुए तुम सुखी रहो. (८)
O God who considers Cupid to be greater than you! May you be happy while consuming my disgusting ajya. (8)