हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
साह॒स्रस्त्वे॒ष ऋ॑ष॒भः पय॑स्वा॒न्विश्वा॑ रू॒पाणि॑ व॒क्षणा॑सु॒ बिभ्र॑त् । भ॒द्रं दा॒त्रे यज॑मानाय शिक्षन्बार्हस्प॒त्य उ॒स्रिय॒स्तन्तु॒माता॑न् ॥ (१)
यह शक्तिशाली वृषभ अर्थात्‌ बैल हजारों गायों को गर्भिणी बनाने में समर्थ है. यह अपनी वीर्यवाहिनी नाड़ियों में अनेक रूप धारण करता है. बृहस्पति संबंधी मंत्रों से युक्त यह बैल गायों के योग्य है. यह दान देने वाले यजमान का मंगल करता हुआ अपनी संतान की वृद्धि करे. (१)
This powerful Taurus i.e. bull is capable of making thousands of cows pregnant. It takes many forms in its semen vessels. This bull with Jupiter-related mantras is worthy of cows. May it increase your child by thanking the donor host. (1)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
अ॒पां यो अग्ने॑ प्रति॒मा ब॒भूव॑ प्र॒भूः सर्व॑स्मै पृथि॒वीव॑ दे॒वी । पि॒ता व॒त्सानां॒ पति॑र॒घ्न्यानां॑ साह॒स्रे पोषे॒ अपि॑ नः कृणोतु ॥ (२)
जो बैल जलों के समान एवं प्रतिमा के समान खड़ा हुआ, जो पृथ्वी के समान सब का स्वामी है, जो बछड़ों का पिता तथा हिंसा न करने योग्य गायों का पति है, वह हमें हजारों प्रकार से संपन्न बनाए. (२)
The bull that stood like water and like a statue, who is the master of all like the earth, who is the father of calves and the husband of non-violence cows, made us prosperous in thousands of ways. (2)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
पुमा॑न॒न्तर्वा॒न्त्स्थवि॑रः॒ पय॑स्वा॒न्वसोः॒ कब॑न्धमृष॒भो बि॑भर्ति । तमिन्द्रा॑य प॒थिभि॑र्देव॒यानै॑र्हु॒तम॒ग्निर्व॑हतु जा॒तवे॑दाः ॥ (३)
वसु के कबंध को धारण करने वाला यह बैल पुमान अर्थात्‌ नर, आंतरिक शक्ति वाला एवं वीर्ययुक्त है. जन्म लेने वालों को जानने वाले अग्नि देव देवों के मार्ग से हमें इंद्र तक पहुचाएं. (३)
This bull, which holds the kabandha of Vasu, is puman i.e. male, inner strength and semen. May the agni gods, who know those who are born, take us to Indra through the path of gods. (3)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
पि॒ता व॒त्सानां॒ पति॑र॒घ्न्याना॒मथो॑ पि॒ता म॑ह॒तां गर्ग॑राणाम् । व॒त्सो ज॒रायु॑ प्रति॒धुक्पी॒यूष॑ आ॒मिक्षा॑ घृ॒तं तद्व॑स्य॒ रेतः॑ ॥ (४)
बैल बछड़ों का पिता एवं हिंसा के अयोग्य गायों का पति होने के साथ ही गरजने वाले मेघों का पालनकर्ता भी है. इस बैल का वीर्य, बछड़ा, जरायु (जेर) प्रतिधुक, अमृत, आमिक्षा एवं घृत के समान है. (४)
The bull is the father of calves and the husband of cows unfit for violence, as well as the rearer of thundering clouds. The semen, calf, geria (jer) of this bull are like antidote, nectar, ambition and ghee. (4)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
दे॒वानां॑ भा॒ग उ॑पना॒ह ए॒षो॒पां रस॒ ओष॑धीनां घृ॒तस्य॑ । सोम॑स्य भ॒क्षम॑वृणीत श॒क्रो बृ॒हन्नद्रि॑रभव॒द्यच्छरी॑रम् ॥ (५)
यह जड़ीबूटियों का रस जलों एवं घृत का भाग है. उपनय देवों का भाग है. इंद्र ने सोम के भक्षण के लिए अर्थात्‌ सोमरस पीने के लिए पर्वत के समान विशाल शरीर धारण किया था. (५)
It is part of the juice water and ghee of herbs. Upanaya is part of devas. Indra wore a huge body like a mountain for the eating of Soma i.e. to drink Someras. (5)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
सोमे॑न पू॒र्णं क॒लशं॑ बिभर्षि॒ त्वष्टा॑ रू॒पाणां॑ जनि॒ता प॑शू॒नाम् । शि॒वास्ते॑ सन्तु प्रज॒न्व इ॒ह या इ॒मा न्यस्मभ्यं॑ स्वधिते यच्छ॒ या अ॒मूः ॥ (६)
हे स्वधिति! तुम सोमरस से भरा हुआ कलश धारण करती हो. त्वष्टा पशुओं को आकार देने वाले हैं. जन्म लेने वाले तुम्हारे लिए मंगलकारी हों. तुम अपनी इन संतानों को हमें प्रदान करो. (६)
O self-respect! You wear an urn full of somers. Skins are the shapers of animals. May those born be auspicious to you. Give us these children of yours. (6)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
आज्यं॑ बिभर्ति घृ॒तम॑स्य॒ रेतः॑ साह॒स्रः पोष॒स्तमु॑ य॒ज्ञमा॑हुः । इन्द्र॑स्य रू॒पमृ॑ष॒भो वसा॑नः॒ सो अ॒स्मान्दे॑वाः शि॒व ऐतु॑ द॒त्तः ॥ (७)
यह बैल आज्य अर्थात्‌ यज्ञ के कारण रूप दूध आदि को धारण करता है. घृत इस का वीर्य है. यह जिन सहस्रो पुष्टियों को प्रदान करता है, उन्हीं को यज्ञ कहा जाता है. है देवो! इंद्र का रूप धारण करता हुआ एवं यजमान के द्वारा दिया हुआ यह बैल हमारे लिए शुभ हो. (७)
This bull wears milk etc. due to ajya i.e. yajna. Disgust is the semen of this. The Sahasro affirmations that it provides are called yajnas. Yes, god! This bull, taking the form of Indra and given by the host, should be auspicious for us. (7)

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 4
इन्द्र॒स्यौजो॒ वरु॑णस्य बा॒हू अ॒श्विनो॒रंसौ॑ म॒रुता॑मि॒यं क॒कुत् । बृह॒स्पतिं॒ संभृ॑तमे॒तमा॑हु॒र्ये धीरा॑सः क॒वयो॒ ये म॑नी॒षिणः॑ ॥ (८)
जो धीर, मनीषी एवं विद्वान्‌ पुरुष हैं, वे बताते हैं कि इस बैल का ओज अर्थात्‌ बल इंद्र का भाग है, इस के बाहु अर्थात्‌ पैर वरुण के भाग हैं, इस का कंधा अश्विनीकुमारों का भाग है और इस की ठाट मरुतों का भाग है. इस का संभृत बृहस्पति का भाग है. (८)
Those who are patient, mystic and learned men, they say that the oz of this bull is the part of Indra, its arms i.e. feet are parts of Varuna, its shoulder is part of Ashwinikumaras and its that is part of maruts. It is part of Jupiter. (8)
Page 1 of 3Next →