हरि ॐ
अथर्ववेद (Atharvaved)
अथर्ववेद (कांड 9)
यो वि॒द्याद्ब्रह्म॑ प्र॒त्यक्षं॒ परूं॑षि॒ यस्य॑ संभा॒रा ऋचो॒ यस्या॑नूक्यम् ॥ (१)
जो ब्रह्म को प्रत्यक्ष रूप में जानता है, उस की गांठें ही संभार हैं तथा तऋचाएं उस का अनूवय हैं. (१)
He who knows Brahman directly, his knots are the sambhar and the verses are his followers. (1)
अथर्ववेद (कांड 9)
सामा॑नि॒ यस्य॒ लोमा॑नि॒ यजु॒र्हृद॑यमु॒च्यते॑ परि॒स्तर॑ण॒मिद्ध॒विः ॥ (२)
सामवेद के मंत्र जिस के रोम हैं और परिस्तरण जिस का हवि है. (२)
The mantras of samaveda which have rom and paristaran which has havi. (2)
अथर्ववेद (कांड 9)
यद्वा अति॑थिपति॒रति॑थीन्प्रति॒पश्य॑ति देव॒यज॑नं॒ प्रेक्ष॑ते ॥ (३)
अथवा जो अतिथियों का स्वामी और अतिथियों को देखता है, वह देव यज्ञ को ही देखता है. (३)
Or the one who sees the master of the guests and the guests sees the God Yajna. (3)
अथर्ववेद (कांड 9)
यद॑भि॒वद॑ति दी॒क्षामुपै॑ति॒ यदु॑द॒कं याच॑त्य॒पः प्र ण॑यति ॥ (४)
अतिथि से जो बोलता है, वही दीक्षा है. जल की याचना ही उस को लाना है. (४)
What speaks to the guest is initiation. The request for water is to bring it. (4)
अथर्ववेद (कांड 9)
या ए॒व य॒ज्ञ आपः॑ प्रणी॒यन्ते॒ ता ए॒व ताः ॥ (५)
जिन्हें यज्ञ में लाया जाता है, ये वे ही जल हैं. (५)
Those who are brought to the yajna are the water. (5)
अथर्ववेद (कांड 9)
यत्तर्प॑णमा॒हर॑न्ति॒ य ए॒वाग्नी॑षो॒मीयः॑ प॒शुर्ब॒ध्यते॒ स ए॒व सः ॥ (६)
जो तर्पण को लाते हैं, वही अग्नि सोमीय तर्पण है. जो यज्ञ में पशु का वध किया जाता है, वही वह है. (६)
Those who bring tarpan is agni somiya tarpan. The one who kills the animal in the yajna is the same. (6)
अथर्ववेद (कांड 9)
यदा॑वस॒थान्क॒ल्पय॑न्ति सदोहविर्धा॒नान्ये॒व तत्क॑ल्पयन्ति ॥ (७)
जो टखनों की कल्पना करता है, वही मानो हवि धान्य का निर्माण है. (७)
He who imagines the ankles is as if the creation of havi grain. (7)
अथर्ववेद (कांड 9)
यदु॑पस्तृ॒णन्ति॑ ब॒र्हिरे॒व तत् ॥ (८)
जिन्हें उपस्तरण कहते हैं, वे ही कुश हैं. (८)
What is called upasterana is Kush. (8)