हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 9.9.10

कांड 9 → सूक्त 9 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 9)

अथर्ववेद: | सूक्त: 9
प्र॒जानां॑ प्र॒जन॑नाय गच्छति प्रति॒ष्ठां प्रि॒यः प्र॒जानां॑ भवति॒ य ए॒वं वि॒द्वानु॑द॒कमु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति ॥ (१०)
जो इस बात को जानता है और जल का उपसेचन कर के अतिथि के हेतु भोजन लाता है, वह संतान को जन्म देने की क्षमता प्राप्त करता है, प्रतिष्ठा पाता है और प्रजाओं का प्रिय बनता है. (१०)
One who knows this and brings food for the guest by reciting water, acquires the ability to give birth to children, gets prestige and becomes the beloved of the people. (10)