हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.100.16

मंडल 1 → सूक्त 100 → श्लोक 16 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 100
रो॒हिच्छ्या॒वा सु॒मदं॑शुर्लला॒मीर्द्यु॒क्षा रा॒य ऋ॒ज्राश्व॑स्य । वृष॑ण्वन्तं॒ बिभ्र॑ती धू॒र्षु रथं॑ म॒न्द्रा चि॑केत॒ नाहु॑षीषु वि॒क्षु ॥ (१६)
इंद्र के अश्व लाल एवं काले रंग वाले, दीर्घ अवयवों से युक्त, आभूषणधारी एवं आकाश में निवास करने वाले हैं. वे ऋजाश्व ऋषि को धन देने के निमित्त आने वाले कामवर्षी इंद्र से अधिष्ठित रथ के जुए को खींचते हैं. मनुष्य सेना इन प्रसन्रतादायक अश्वों को जानती है. (१६)
Indra's horses are red and black in colour, with long components, ornamented and inhabited the sky. They pull the yoke of the chariot installed from the incoming kamvarshi Indra to give money to the sage Rizashwa. The human army knows these inspiring horses. (16)