ऋग्वेद (मंडल 1)
स म॑न्यु॒मीः स॒मद॑नस्य क॒र्तास्माके॑भि॒र्नृभिः॒ सूर्यं॑ सनत् । अ॒स्मिन्नह॒न्सत्प॑तिः पुरुहू॒तो म॒रुत्वा॑न्नो भव॒त्विन्द्र॑ ऊ॒ती ॥ (६)
शत्रुहिंसक, संग्रामकर्ता, सज्जनों के पालक एवं अनेक यजमानों द्वारा बुलाए गए इंद्र आज के दिन हमें सूर्य के प्रकाश का उपभोग करने दें एवं मरुतों के सहयोग से हमारे रक्षक बनें. (६)
Indra, called by enemy hunters, combatants, protectors of gentlemen and many hosts, let us consume sunlight on this day and be our protectors with the help of the Maruts. (6)