हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.106.2

मंडल 1 → सूक्त 106 → श्लोक 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 106
त आ॑दित्या॒ आ ग॑ता स॒र्वता॑तये भू॒त दे॑वा वृत्र॒तूर्ये॑षु श॒म्भुवः॑ । रथं॒ न दु॒र्गाद्व॑सवः सुदानवो॒ विश्व॑स्मान्नो॒ अंह॑सो॒ निष्पि॑पर्तन ॥ (२)
हे आदित्यो! तुम युद्धों में हमारी सहायता करने के लिए आओ एवं युद्धों में हमारे सुखदाता बनो. निवासस्थान देने वाले एवं शोभनदानयुक्त देव पापों से बचाकर हमारा उसी प्रकार पालन करें, जैसे सारथि रथ को ऊंचे-नीचे मार्ग से बचाकर ले जाता है. (२)
Hey Aditya! You come to help us in wars and be our comforters in wars. May the god who gives abode and adorn us from sins and follow us in the same way as the charioteer takes the chariot away from the high and low path. (2)