हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.106.5

मंडल 1 → सूक्त 106 → श्लोक 5 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 106
बृह॑स्पते॒ सद॒मिन्नः॑ सु॒गं कृ॑धि॒ शं योर्यत्ते॒ मनु॑र्हितं॒ तदी॑महे । रथं॒ न दु॒र्गाद्व॑सवः सुदानवो॒ विश्व॑स्मान्नो॒ अंह॑सो॒ निष्पि॑पर्तन ॥ (५)
हे बृहस्पति! हमें सदा सुख दो. तुममें रोगों के शमन एवं भयों को दूर करने की जो मानवानुकूल शक्ति है, हम उसे भी मांगते हैं. निवासस्थान देने वाले एवं शोभनदानयुक्त देव पापों से बचाकर हमारा उसी प्रकार पालन करें, जिस तरह सारथि रथ को ऊंचेनीचे स्थान से बचाकर ले जाता है. (५)
O Jupiter! Give us happiness forever. We also demand the human-friendly power that you have to alleviate diseases and remove fears. Let the god who gives the abode and the god of adornments follow us in the same way as the charioteer takes the chariot away from the high and low place. (5)