ऋग्वेद (मंडल 1)
आ भ॑रतं॒ शिक्ष॑तं वज्रबाहू अ॒स्माँ इ॑न्द्राग्नी अवतं॒ शची॑भिः । इ॒मे नु ते र॒श्मयः॒ सूर्य॑स्य॒ येभिः॑ सपि॒त्वं पि॒तरो॑ न॒ आस॑न् ॥ (७)
हे वज्रबाहु इंद्र एवं अग्नि! धन लाओ, हमें दो एवं अपने कार्यो के द्वारा हमारी रक्षा करो. सूर्य की जिन रश्मियों द्वारा हमारे पूर्व पुरुष ब्रह्मलोक को गए थे, वे ये ही हैं. (७)
O Vajrabahu Indra and Agni! Bring us money, give us and protect us through your actions. These are the rays of the Sun by which our former men went to Brahmaloka. (7)