हरि ॐ

ऋग्वेद (Rigved)

ऋग्वेद 1.112.11

मंडल 1 → सूक्त 112 → श्लोक 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

ऋग्वेद (मंडल 1)

ऋग्वेद: | सूक्त: 112
याभिः॑ सुदानू औशि॒जाय॑ व॒णिजे॑ दी॒र्घश्र॑वसे॒ मधु॒ कोशो॒ अक्ष॑रत् । क॒क्षीव॑न्तं स्तो॒तारं॒ याभि॒राव॑तं॒ ताभि॑रू॒ षु ऊ॒तिभि॑रश्वि॒ना ग॑तम् ॥ (११)
हे सुंदर दान वाले अश्चिनीकुमारो! तुमने जिन उपायों से उशिजा के पुत्र एवं वाणिज्य कर्म करने वाले दीर्घश्रवा के निमित्त मेघ से जल बरसाया एवं स्तुतिकर्ता कक्षीवान्‌ की रक्षा की, उन्हीं उपायों को लेकर यहां आओ. (११)
O beautiful dan yeshinikumaro! Come here with the same measures by which you rained water from the cloud and protected the praiseworthy chamber for the long-time of Ushija's son and the merchandise. (11)